मनोरमा ने जिया को इशारों मैं कुछ बोला । जिसे समझ जिया बोली यह झूठ बोल रही है जबकि इसी ने आंटी से चाय मंगवाई थी और इसी में पैर मार के गिरा दी और किसी को शक ना हो तो देखो झूठ निशान अपने हाथ में बना ली।
ऋषि गुस्से में बौखलाया हुआ है तुम माफी मांग रही हो कि नहीं ।
पूर्णा भरे गले से जब मैं कोई गलती की नहीं तो मैं माफी किस गलती की मांगू । Mom यह आप से जरूर माफी मांगेगी हम अभी आते हैं।
ऋषि पूर्णा को लगभग घसीटते हुए ले जाने लगा। मनोरमा और जिया यह देख शातिर करीके से मुस्कुराने लगी।
वही ऋषि पूर्णा को कमरे के अंदर ला कर जमीन मैं पटक दिया और डोर लॉक कर पूर्णा की तरफ़ बड़ने लगा ।
मास्टर प्लीज मै सच बोल रही हूं मैं कुछ नहीं किया । बल्कि मैं चाय मॉम के लिए लेकर जा रही थी बट ठोकर लग गया और चाय गिर गया।




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